Pachmarhi Places to Visit 2024 in Hindi : भारत की सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी घूमने की पूरी जानकारी –

famous places in pachmarhi: आज का यह लेख आपकों मध्यप्रदेश के सतपुडा पहाड़ पर स्थित गुफाओं तथा उसके आस पास स्थित अन्य गुफा, हिल स्टेशन, मंदिर, राष्ट्रीय उद्यान, सन प्वाइंट पर है. आपकों बता दें कि उसके आस पास स्थित सैलानियों के लिए रोमांचक जगहों के बारे में भी जानेंगे, जो बेहद ही खूबसूरत और प्रकृति से परिपूर्ण है. जहां पर झील पहाड़, पर्वत, नदियां और पहाड़ों पर हरियाली हैं,

Pachmarhi Places to Visit in Hindi : भारत की सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी घूमने की पूरी जानकारी –

इसके अलावा हम आपको pachmarhi utsav 2024 चीजों को बताने जा रहा हूँ जो महाभारत काल की पांडव गुफा के रूप में प्रसिद्ध हैं जहां हर वर्ष लाखो लोग जाते है तो चलिए जानते है विस्तार से-

पंचमढ़ी का सम्पूर्ण परिचय : pachmarhi kya hai

पंचमढ़ी मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित हैं यह नर्मदा नदी के निकट स्थित हैं जो समुद्र तल से करीब 3,600 फिट से 4,000 फिट की ऊँचाई पर हैं।यह स्थान नर्मदा नदी के निकट सतपुडा की पहाड़ियों पर है। यहां पर काफी पुरानी पांच मधियो का एक गुफा हैं।इसीलिए इसे पंचमढ़ी का गुफा कहते है,

pachmarhi kya hai

पौराणिक कथाओं वं भविष्य पुराण के अनुसार यह गुफा महाभारत कालीन हैं, ऐसी कथा व्याप्त है कि पांडव पुत्र अपने अज्ञात वास दौरान यहां पर कुछ समय व्यतीत किये थे। पंचमढ़ी को ‘मध्य प्रदेश की छत’ भी कहा जाता है।

इस प्राचीन गुफा का सम्पूर्ण इतिहास: pachmarhi ka itihas

pachmarhi expenses:  इसका नाम पंचमढ़ी का क्यों पड़ा, वो तो आपको ऊपर बता ही दिया हु,लेकिन भविष्य पुराण के अनुसार एक और कथा व्यतीत है, जिसके अनुसार भगवान शिव के अनेक शैलचित्र इस पहाड़ी के शैलाश्रयों में मिला था। इनमें अधिकांश शैलचित्र करीब 10,000 वर्ष पुरानी मानी जाती हैं, और बहुत सारी शैलचित्र मध्यकाल के 8वी सदी के है। महादेव पर्वत के 7 से 8 km के अंदर में 50 शिलाश्रय चित्र प्राप्त हुआ।

इन गुफ़ा और चित्रों की खोज डॉ.एच. गार्डन ने किया था।इस गुफा में मौजूद चित्र मध्यकाल, वैदिक काल, आदिकाल में बनाये गये हैं, जो काफी रिचार्ज के बाद जानकारी प्राप्त हुआ।इसमें कुछ चित्र मानवकृत तख़्तिनुमा औऱ डमरू के आकार में है जो पूर्वकाल के बताया जाता हैं।इसके अलावा मध्यकाल के चित्र
परिष्कृत रूप में दृष्टिगोचर प्राप्त हुआ हैं। इसमें करीब 7 मुख्य गुफ़ाएँ हैं –

इस प्राचीन गुफा का सम्पूर्ण इतिहास: pachmarhi ka itihas
Pandav Cave Pachmarhi, Madhya Pradesh, India

जो इस प्रकार है –इमली खोह, बनियाबेरी, मोण्टेरोजा, डोरोथीडीप, जम्बूदीप, निम्बूभोज, लश्करिया खोह, भांडादेव हैं।इस प्रसिद्ध पंचमढ़ी के गुफाओं में मानव जीवन बिभिन्न प्रकार के सामान्य जीवन की झाँकी बखूबी चित्रित की गयी है।

इन सब के अलावा इस गुफा में शेर का आखेट, सनातन धर्म का प्रतीक स्वस्तिक की चिह्न , कई तरह के क्रीड़ा नृत्य, बकरी, सितार, गर्दभ मुँह वाला युवा, तंतुवाद्य का वादन करते युवक, दिव्यर थवाही, धनुर्धर आदि के अनेक मानव और पशुओं की आकृतियाँ चित्रित की गई हैं। सर्वाधिक चित्रण शिकार पर आधारित है।

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गुफा की खोज कब और किसने की

पंचमढ़ी के इस पांडव गुफाओं को बौद्ध भिक्षु के विषय में जोड़ा जाता है आधुनिक काल में के विद्वानों के अनुसार।पंचमढ़ी गुफा को सर्वप्रथम 1862 में कैप्टन फोरसैथ ने की थी।जिसका जिक्र एक भारतीय पुस्तक हाइलैंड्स ऑफ सेंट्रल इंडिया में बखूबी से बताया गया है।

जिसमें यह लिखा हुआ है कि, उस समय के चीफ कमिश्नर सर रिचर्ड टेंपल ने,17वी सदी के आखिरी में सतपुडा की पहाड़ो पर,इस क्षेत्र के अध्ययन के लिए कैप्टन फोरसैथ को भेजा था, उनके टीम के साथ।pachmarhi adventure camp

धूपगढ़: pachmarhi mountain

धूपगढ़: pachmarhi mountain
Sun point

धूपगढ़ एक प्राकृतिक स्थल है जो पंचमढ़ी से करीब 9 किलोमीटर दूर 1350 मीटर की पहाड़ी पर यह स्थित है। आपको बता दें कि धूपगढ़ मध्यप्रदेश ही नही बल्कि पूरे मध्य हिंदुस्तान की सबसे ऊँची चोटी में से एक है.

यह सुंदर स्थान सनराइज और सनसेट, ट्रेकिंग और हाइकिंग तथा एडवेंचर लवर्स आदि के लिए यह एक फेमस स्थान है. जब तीर्थयात्री धूपगढ़ जाते है तो उन्हे जाते वक्त रोड  के दोनों किनारे अदभुत तथा बड़े बड़े आकार के बहुत सारे विशाल पहाड़ों की ऊंची चोटियां मौजूद है।

और इस प्रकार आप प्रकृति की अद्भुद नज़ारे को देखते और अपने कैमरे में कैद करते हुए आप कुछ ही पल में धूपगढ़ मस्ती से पहुँच जायेंगे। आपकी बता दें कि धूपगढ़ एक जगह हैं ।

जहा पर सूर्य उदय तथा सूर्य अस्त देखने के लिए पूरे दुनियां के कोने कोने से देशी विदेशी तीर्थयात्री यहाँ पर खासकर सुबह अथवा शाम को एक बार जरूर आते हैं और लोग अपनी सेल्फी सूर्य के धीरे धीरे पहाड़ों के पीछे पिछे जाते और आते हुए लालिमा में लीन हो जाते हैं।pachmarhi explore

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान: pachmarhi destination wedding 2024

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान वनस्पतियों तथा जीवों के संरक्षण के लिए साल 1981 में बना था. यह उधान पचमढ़ी में स्थित है जो कि 2133.30 वर्ग कि.मी. के क्षेत्र पर फैला  है . इसे सतपुड़ा राष्ट्रीय पार्क भी कहा करते थे जहा कई वन लुप्तप्राय प्रजातियां रहती हैं. पर्यटक को देखने के लिए यहां पर कई अलग अलग प्रकार के जानवर रहते हैं ।

जैसे में – बाघ,बायसन, तेंदुए, सांभर, चीतल,माऊस डीअर, चिंकारा, भौंकने वाले काली हिरण, इन्डियन विशाल गिलहरी, मगरमच्छ, पोर्क्यूपिन, लंगूर, नीलगाय, जंगली कुत्ते, जंगली सूअर,जंगली बिल्ली, चौसिंघा, लंगूर, सियार, लोमड़ी और भालू आदि भी देखे जा सकते है।

वही दूसरी तरफ आपको जल में रहने वाले जीव जंतु भी मौजूद है जिसका आप दीदार कर सकते हैं मगरमच्छ, घड़ियाल, दरिया घोड़ा तथा मछली आदि की कई सारी प्रजातीया आपकों यहाँ पर देखने को मिल जाती है.

साथ ही आपको गिद्ध,कौआ, इग्रेट,  बाज,ईगल, बटेर, बकुला तीतर, गौरिया,तोता, नीली चिड़िया,मैना, बुलबुल, हंस, मालाबार तथा पाईड हॉर्नबिल जैसी कई सारी चिड़िया इस जंगली में पाए जाते हैं. पर्यटक सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी, जिप सफारी,नौका विहार और हाथी आदि की सवारी का आनंद ले सकते है।

महादेव मंदिर

pachmarhi bada mahadev: पंचमढ़ी गुफा और महादेव पर्वत के आसपास 18वी, 19वी शताब्दी में गोंड और कोरक जाती के आदिवासी समुदाय के लोग रहते थे जो,अब नहीं है, यह बात यहां मौजूद प्रमुख चट्टानों पर उल्लेखित लेख पर हैं।

जिनके कई चित्र भी बनाई गई हैं, ऐसा माना जाता हैं कि यहां बनाई गई चित्र यह प्रदर्शित करती हैं कि यहां मौजूद पूर्व में लोग मुखतयः गाय, बैल हाथी,घोड़े रथ आदि का उपयोग करते होंगे।

जो बखूबी यहां चित्रों में उल्लेखनीय हैं गोंडा जाती के आदिवासी समुदाय के इतिहास्कार यह कहते है कि यह सब स्थान महादेव पर्वत और पंचमढ़ी वं चौरागढ़ गोंडा जाती के मूल स्थान काचीकोपालोहागढ़ में ही आता हैं, जहां आज भी एक देव स्थान महादेव मंदिर है और उस मंदिर में भगवान महादेव की एक प्रतिमा भी हैं।

जहां मनवांछित फल प्राप्त होने पर भक्त अपने आराध्य महादेव को त्रिशूल चढ़ाते हैं । मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध नदी बेताव नदी का उदगम स्थल यही पंचमढ़ी हैं, जो समंदर के तल से करीब 4500 फिट ऊंचाई पर है।

गुफाओं के आसपास पर्यटनीय स्थल

प्राकृतिक झील पंचमढ़ी

pachmarhi attractions, pachmarhi कैंपिंग2024: पंचमढ़ी गुफा के आसपास चौरागढ़,महादेव पर्वत और वहां स्थित महादेव मंदिर, जहां त्रिशूल ही त्रिशूल हैं, इसके अलावे भी आपको प्रकृति से परिपूर्ण काफी कुछ देखने को मिलेंगे जो अत्यंत सुंदर औऱ औलाकिक दिखने को मिलता हैं।

इसके पास में ही बेतवा नदी का उद्गम स्थल ,झरने मिलेंगे जहां लोग प्राकृतिक झरने का लुत्फ भी उठाते हैं और सबसे खास तौर पर आपको सतपुडा की पहाड़ियों पर घूमने का अवसर प्राप्त हो जाता हैं।pachmarhi weather 2024

पंचमढ़ी भोपाल से करीब 250 km दूर स्थित हैं। यहां सैलानियों के घूमने के लिए छोटी छोटी जीप उपलब्ध रहती हैं, जिसके लिये आपको पैसा देना पड़ता हैं ।

पचमढ़ी में घूमने की अन्य खुबसूरत स्थान 2024: Pachmarhi Tourist Places In Hindi

अप्सरा विहार

बी फॉल

रीछगढ़

रजत प्रपात

डचेस फॉल्स

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महादेव गुफा

पांडव गुफा

गुप्त महादेव मंदिर

धूपगढ़

जटा शंकर

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान

हांडी खोह

चौरागढ़ महादेव मंदिर

प्रियदर्शिनी प्वाइंट

पंचमढ़ी कैसे जाएं : pachmarhi kab jana chahiye

यह स्थान पहुचने के लिए आपको मध्यप्रदेश के राजधानी भोपाल सडक, रेल,या हवाई मार्ग से आना होगा।उसके बाद वहां से रेलमार्ग से नजदीकी स्टेशन पिपरिया या इटारसी जाना होगा।या आप सड़क मार्ग द्वारा भी पहुंच सकते है, जहां से 50 km दूर किसी गाड़ी द्वारा आप पंचमढ़ी पहुंच सकते है। bhopal to pachmarhi distance

ठहरने के स्थान

पंचमढ़ी में सैलानियों के रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में अलग अलग प्रकार के आवासीय होटल,गेस्ट हाउस pachmarhi resorts हैं, chunmun cottage pachmarhi,dharamshala in pachmarhi, apsara vihar pachmarhi foothill cottage pachmarhi,

जहां सैलानी अपने आर्थिक स्थिति के अनुसार किसी भी जगह रुक सकते है और अपने टूरिस्ट यात्रा अच्छी से कर सकते है, इसके अलावा आपको सरकारी होटल भी हैं जो मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के द्वारा संचिलत होती हैं

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